बढ़ते शहरी प्रदूषण और ट्रैफिक जाम का सबसे सुलभ और प्रभावी इलाज क्या है? इसका जवाब आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों ने अपने पैडल से दिया। रविवार सुबह 8 बजे से 10 बजे तक, BHU के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (VT) परिसर में 'साइकिल पर संडे' (Cycle on Sunday) कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया।
क्लाइमेट एजेंडा (Climate Agenda) संस्था के 'हरित सफ़र अभियान' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में BHU, वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKV) के छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
🌍 क्यों जरूरी है 'साइकिल संस्कृति' की वापसी?
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के बीच साइकिल चलाने की संस्कृति को फिर से जीवित करना था। आज के दौर में साइकिल सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने का एक 'शून्य-उत्सर्जन' (Zero-Emission) हथियार है:
- 🌿 प्रदूषण पर लगाम: निजी मोटर वाहनों की बढ़ती संख्या वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन का मुख्य कारण है। नॉन-मोटराइज़्ड ट्रांसपोर्ट (NMT) अपनाकर इसे घटाया जा सकता है।
- 💪 उत्तम स्वास्थ्य: शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य के लिए साइकिलिंग एक बेहतरीन दिनचर्या है।
- 🚦 ट्रैफिक से निजात: सड़कों पर भीड़ कम करने और शहरों को अधिक रहने योग्य बनाने के लिए साइकिलिंग एक ठोस कदम है।
🚧 शहर प्रशासन से सीधी मांग: "हमें चाहिए सुरक्षित साइकिल लेन"
कार्यक्रम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू शहर प्रशासन को जगाना था। छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि BHU जैसे सुरक्षित परिसर में साइकिल चलाना आसान है, लेकिन बाहर की सड़कों पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। सुरक्षित साइकिल लेन और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ (Safe NMT Infrastructure) के बिना, शहर में साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देना महज़ एक कोरी कल्पना है।
👥 MSW के छात्रों ने संभाला मोर्चा
इस जागरूकता अभियान में मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) विभाग के इंटर्न और वोलंटियरों ने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। प्रमुख रूप से दीपक कोरी, तन्मय कुमार, वैभव, ऋतिका, अनन्या उपाध्याय, वैष्णव, प्रियांशी, रोहित और पवन ने सक्रिय भूमिका निभाई। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से गीता पासवान ने पूरी टीम का शानदार नेतृत्व किया।
कार्यक्रम के अंत में क्लाइमेट एजेंडा की प्रोग्राम डायरेक्टर एकता शेखर ने कहा, "साइकिल का आविष्कार आवाजाही के संकट को हल करने के लिए हुआ था। आज जलवायु संकट को देखते हुए हमें फिर से इसे अपनाने की ज़रूरत है। अगर हम साइकिल को अपना 'फैशन स्टेटमेंट' बना लें, तो शहरी उत्सर्जन और कंजेशन दोनों पर काबू पा लेंगे। इसकी शुरुआत 'संडे से संडे' करें। लेकिन यह तभी संभव है जब शहर प्रशासन सुरक्षित साइकिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर दे।"
जलवायु परिवर्तन की लड़ाई सिर्फ एसी कमरों में बैठकर नीतियां बनाने से नहीं जीती जाएगी। यह लड़ाई सड़कों पर आदतों को बदलकर लड़नी होगी। BHU और काशी के छात्रों की यह पहल प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शहर को अब 'स्मार्ट' के साथ-साथ 'इको-फ्रेंडली' भी बनना होगा।
हर हर महादेव! 🙏




0 टिप्पणियाँ