BHU News: AI और शिक्षा के रिश्ते पर प्रो. राजीव संगल का बड़ा बयान, कहा- 'तकनीक के युग में तार्किकता और विश्लेषण क्षमता ही दिलाएगी रोजगार'
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन और शिक्षा को किस तरह बदल रहा है? क्या इससे नौकरियां खत्म होंगी या नए अवसर पैदा होंगे? इन सभी ज्वलंत सवालों पर आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में गहन मंथन हुआ।
अवसर था मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र एवं अन्तर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक विशिष्ट व्याख्यान का। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था— 'Artificial Intelligence and Education : Opportunities and Challenges' (कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा : अवसर और चुनौतियां)। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता IIT-BHU के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव संगल थे।
🌐 'भाषिणी' एप: 70 रिसर्च ग्रुप्स की मेहनत का परिणाम
अपने व्याख्यान की शुरुआत करते हुए प्रो. संगल ने भारत सरकार के बहुचर्चित 'नेशनल मिशन भाषिणी एप' (Bhashini App) का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसके विकास में देश के विभिन्न अकादमिक संस्थानों के 70 रिसर्च समूहों (Research Groups) ने मिलकर काम किया है। (यह एप 36 भारतीय भाषाओं में अनुवाद का कार्य करता है।)
💡 AI के दौर में कैसी होनी चाहिए हमारी 'स्किल्स'?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रयोग को लेकर प्रो. संगल ने छात्रों और शिक्षकों को सावधान करते हुए कई अहम सुझाव दिए:
- कोर स्किल्स पर फोकस: AI का सही इस्तेमाल करने के लिए हमें अपनी तार्किकता (Logic), विश्लेषण क्षमता (Analytical Skills) और प्रभावी संप्रेषण (Communication) को मजबूत करना होगा।
- रोजगार और तकनीक: अब सिर्फ 'परंपरागत ज्ञान' से काम नहीं चलेगा। रोजगार के नए अवसर उन्हें ही मिलेंगे जिनके पास आलोचनात्मक बुद्धि (Critical Thinking) होगी।
- स्थानीय डेटा का महत्व: AI को सार्थक बनाने के लिए 'संदर्भित डेटा' चाहिए। स्कूल-कॉलेज के छात्र स्थानीय और लोक ज्ञान का डेटाबेस तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
⚠️ AI के नकारात्मक प्रभाव और शिक्षक की बदलती भूमिका
प्रो. संगल ने केवल तकनीक की तारीफ नहीं की, बल्कि इसके खतरों से भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि AI के कारण समाज में पारिवारिक समस्याएं, अकेलापन और मानसिक अवसाद (Depression) भी बढ़ रहा है। ऐसे दौर में एक अध्यापक की भूमिका केवल पढ़ाने (मेंटर) तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अब एक मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक (Philosopher and Guide) बनना होगा।
व्याख्यान के बाद श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए प्रो. संगल ने एक बहुत बड़ी बात कही— "नई तकनीक कुछ रोजगार खत्म करती है, लेकिन कंप्यूटर क्रांति की तरह यह बड़ी संख्या में नए रोजगार भी पैदा करती है। AI 'मानसिक श्रम' के क्षेत्र में नए अवसर लाएगा। भविष्य में 'सर्टिफिकेट' की बजाय व्यक्ति की 'ज्ञान को धारण करने की क्षमता' ही उसकी असली योग्यता मानी जाएगी।"
👥 कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण एवं उपस्थितगण
मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने प्रो. संगल द्वारा मशीन अनुवाद और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना की। अंत में अन्तर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. राजकुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में प्रो. कमलशील, प्रो. आर. के. मण्डल, प्रो. आर. के. मिश्रा, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. अर्चना कुमार, प्रो. अजय सिंह, प्रो. प्रशांत, डॉ. प्रवीण, डॉ. योगेश, डॉ. जहीर, डॉ. उषा त्रिपाठी, डॉ. धर्मजंग, डॉ. राजीव वर्मा के साथ शोधार्थी नेहा, कंचन, रंजीत और अंजलि सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।
हर हर महादेव! 🙏



0 टिप्पणियाँ