BHU में कैंट से सीधे VT तक ई-बस सेवा: छात्रों के हित में या शहर की भीड़ को कैंपस में घुसाने की तैयारी?

BHU में कैंट से सीधे VT तक ई-बस सेवा: छात्रों के हित में या शहर की भीड़ को कैंपस में घुसाने की तैयारी?

E-bus started from Varanasi Cantt to BHU VT Newspaper clipping


वाराणसी:
हाल ही में वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड ने कैंट स्टेशन से सीधे बीएचयू विश्वनाथ मंदिर (VT) तक 6 ई-बसों का संचालन शुरू किया है। इसे विद्यार्थियों, शिक्षकों और दर्शनार्थियों के लिए एक बड़ी सुविधा के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

लेकिन अगर इसे BHU के एक आम छात्र के नजरिए से देखें, तो यह 'सुविधा' कम और 'समस्या' ज्यादा नजर आती है। सवाल यह है कि क्या वाकई BHU के छात्रों को कैंट से सीधे VT तक बस की जरूरत थी? या फिर यह शहर की भीड़ को जबरन विश्वविद्यालय परिसर में धकेलने का एक नया तरीका है?


🚦 लंका गेट पर ऑटो की भरमार, फिर सीधे VT तक बस क्यों?

बनारस में रहने वाला हर व्यक्ति जानता है कि BHU लंका गेट से कैंट, मंडुआडीह, सिटी स्टेशन और मुगलसराय के लिए 24 घंटे आसानी से ऑटो उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में शहर की 'ओवरक्राउड' (Overcrowd) को सीधे कैंपस के दिल यानी VT (विश्वनाथ मंदिर) तक लाने का क्या औचित्य है? शाम के समय VT पर पहले ही इतनी भीड़ होती है कि वहां नरक जैसी स्थिति बन जाती है; मेन गेट पर अक्सर जाम लगा रहता है। इस नई बस सेवा से BHU की ऊर्जा और संसाधनों का केवल दुरुपयोग ही होगा।


📍 असली जरूरत: डेलिगेसी (Delegacy) के छात्रों के लिए चलें बसें

अगर प्रशासन सच में छात्रों का भला चाहता है, तो उसे यह समझना होगा कि BHU का छात्र कैंट स्टेशन पर नहीं, बल्कि कैंपस के आस-पास के इलाकों में रहता है।

  • इन रूटों पर है भारी दिक्कत: हजारों छात्र छित्तूपुर, सीर गोवर्धनपुर, नारिया, करौंदी, हैदराबाद गेट, सामनेघाट और सुंदरपुर के इलाकों में डेलिगेसी (किराए के कमरे) में रहते हैं।
  • कैंपस पहुंचने का संघर्ष: इन गेट्स से छात्रों को अपने संबंधित विभागों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तपती धूप या बारिश में पैदल चलना किसी सजा से कम नहीं है।
  • सही समाधान: अगर बस चलानी ही है, तो इन बाहरी गेट्स (छित्तूपुर, करौंदी, नारिया आदि) से कैंपस के अंदर के विभागों तक चलाई जानी चाहिए।

🚌 BHU की तथाकथित 'कैंपस बस' की सच्चाई

कैंपस के अंदर अभी जो बस सेवा चल रही है, उसकी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। 'कैंपस बस' के नाम पर यह बस सिर्फ लंका गेट से विश्वनाथ मंदिर (VT) तक का चक्कर काटती है। यह बस पूरे कैंपस कवर ही नहीं करती। जब खुद की कैंपस बस का रूट इतना सीमित है, तो बाहर की ई-बसों को अंदर लाने का क्या मतलब?


🗣️ माननीय मेयर महोदय (श्री अशोक तिवारी जी) से अपील:
आप बनारस के मेयर होने के साथ-साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) के सम्मानित सदस्य भी हैं। लंका से मंदिर तक का 10 रुपये किराया रखा गया है। गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों से ई-बस का यह किराया वसूलना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।

BHU छात्र आपसे करबद्ध निवेदन करता है: अपना दिल बड़ा करिये और BHU के विद्यार्थियों को उनके ID कार्ड पर इस ई-बस सेवा का 'निःशुल्क' (Free) लाभ दीजिये। यदि ऐसा नहीं होता है, तो छात्र इसे अपनी सुविधा नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में नगर निगम की 'घुसपैठ' ही मानेंगे।


विश्वविद्यालय को थकाया जा रहा है। विकास और सुविधा के नाम पर कैंपस की शांति और अकादमिक माहौल से समझौता नहीं किया जा सकता। प्रशासन को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी— पर्यटन या छात्र हित?

हर हर महादेव! 🙏

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