राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी: BHU का वो छात्र, जिसने कलम और बंदूक दोनों से हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव


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राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी: BHU का वो छात्र, जिसने कलम और बंदूक दोनों से हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव

"फांसी के तख्ते पर चढ़ते हुए भी जिनके चेहरे पर मुस्कान थी, वो भारत मां के वीर सपूत राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को आज उनके जन्मदिवस पर सादर नमन।"

वाराणसी: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल पन्नों में नहीं, बल्कि जन-मानस की चेतना में जीवित रहते हैं। ऐसे ही अमर शहीद हैं राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्र रहे लाहिड़ी जी न केवल एक मेधावी इतिहास के विद्यार्थी थे, बल्कि वे एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन को यह बता दिया था कि भारत का युवा अब चुप नहीं रहने वाला।

BHU: जहाँ से मिली क्रांति की प्रेरणा

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का BHU से अटूट नाता रहा। यहाँ के इतिहास विभाग में पढ़ते हुए उन्होंने दुनिया भर की क्रांतियों का अध्ययन किया। BHU का वह वातावरण, जहाँ महामना मदन मोहन मालवीय जी के संस्कार और देशभक्ति का संगम होता था, लाहिड़ी जी के मन में मातृभूमि के प्रति बलिदान की भावना को और प्रगाढ़ कर दिया। उनके लिए इतिहास पढ़ना केवल डिग्री लेना नहीं, बल्कि उस गुलामी को समझना था जिससे देश को आजाद कराना था।

काकोरी कांड और अडिग साहस

लाहिड़ी जी 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के एक प्रमुख स्तंभ थे। उनका मानना था कि अहिंसा के साथ-साथ सशस्त्र क्रांति की भी आवश्यकता है। उन्होंने काकोरी ट्रेन एक्शन में सक्रिय भूमिका निभाई। गिरफ्तारी के बाद जब उन पर मुकदमा चला, तो भी वे विचलित नहीं हुए। जेल की कालकोठरी में भी उन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा और अंत तक एक निडर क्रांतिकारी बने रहे।

बलिदान की गाथा:
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तय तारीख से दो दिन पहले ही 17 दिसंबर, 1927 को गोंडा जेल में फांसी दे दी थी, क्योंकि सरकार को डर था कि उनके समर्थकों की भीड़ जेल पर हमला कर देगी। लेकिन मौत भी उनके इरादों को तोड़ नहीं सकी।

युवा पीढ़ी के लिए सीख

आज जब हम BHU के प्रांगण में चलते हैं, तो राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जैसे बलिदानी छात्रों की पदचाप सुनाई देती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा का सही उपयोग केवल व्यक्तिगत प्रगति नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा है। उनके साहस, त्याग और देशभक्ति को नमन करते हुए आज हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।


शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी अमर रहें! 🙏

"काशी हिंदू विश्वविद्यालय का हर छात्र आपके बलिदान पर गर्व करता है।"

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