BHU स्वास्थ्य सेवा विस्तार: 18 निजी अस्पतालों के साथ करार, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगी CGHS दरों पर निर्बाध चिकित्सा सुविधा
वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बड़ा और जनहितैषी निर्णय लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।
पृष्ठभूमि: क्यों पड़ी इस नए करार की आवश्यकता?
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के शिक्षक, कर्मचारी और पेंशनभोगी लंबे समय से चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की जटिलताओं से जूझ रहे थे। अब तक की व्यवस्था में लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के बाद बिलों की प्रतिपूर्ति के दौरान भारी आर्थिक अंतर का सामना करना पड़ता था। अस्पताल की वास्तविक फीस और सरकार द्वारा निर्धारित CGHS दरों के बीच का बड़ा अंतर सीधे तौर पर लाभार्थियों की जेब पर बोझ डालता था। इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कर्मचारियों की इस मांग को प्राथमिकता दी है।
नई व्यवस्था: अब इलाज होगा पूरी तरह पारदर्शी
बुधवार को संपन्न हुए इस आधिकारिक कार्यक्रम में, वाराणसी के 18 प्रमुख निजी अस्पतालों के साथ विश्वविद्यालय ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस नए करार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब मरीजों को CGHS की निर्धारित दरों पर ही चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
समझौते के मुख्य बिंदु:
- आर्थिक सुरक्षा: अब लाभार्थियों को अस्पताल शुल्क और सरकारी दरों के बीच के अंतर का भुगतान स्वयं नहीं करना पड़ेगा।
- सूचीबद्ध अस्पताल (प्रमुख): एपेक्स हॉस्पिटल, गैलेक्सी हॉस्पिटल, हेरिटेज हॉस्पिटल, और साई मेडिसिटी सहित कुल 18 अस्पताल इस सुविधा के दायरे में आएंगे।
- डिजिटल सुगमता: कंप्यूटर सेंटर द्वारा एक विशेष 'डिजिटल सत्यापन' प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे पात्रता की जांच रियल-टाइम में हो सकेगी।
विस्तार की रणनीति: केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि देशभर में सुरक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने केवल वाराणसी तक सीमित न रहकर, व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए देशभर के 40 से अधिक बड़े अस्पतालों को चिन्हित किया है। यह कदम उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए राहत लेकर आया है जो रिटायरमेंट के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। चाहे दिल्ली-एनसीआर हो, मुंबई हो या कोलकाता—देश की प्रमुख राजधानियों में अब BHU के लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। इन सभी अस्पतालों के साथ करार प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।
भविष्य की राह और प्रशासन का दृष्टिकोण
CGHS क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. राकेश रमन के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को दीर्घकालिक और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की व्यावहारिक समस्या या शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक समर्पित ई-मेल आईडी सक्रिय की जा रही है। कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का ध्येय अपने परिवार (शिक्षक और कर्मचारी) को एक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य वातावरण प्रदान करना है, और यह व्यवस्था इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
संपादकीय टिप्पणी:
BHU का यह कदम एक बड़े प्रशासनिक सुधार को दर्शाता है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि निजी स्वास्थ्य क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थान के बीच का तालमेल भी बेहतर होगा। यह देखना सुखद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 'डिजिटल इंडिया' को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़कर एक मॉडल पेश किया है।


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