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| BHU और IGIMS पटना के बीच एमओयू हस्ताक्षर के दौरान उपस्थित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारी। |
BHU और IGIMS का ऐतिहासिक समझौता: चिकित्सा शिक्षा, शोध और रोगी देखभाल को मिलेगा नया आयाम | अब संयुक्त परियोजनाओं पर करेंगे काम
वाराणसी/पटना:
स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अनुसंधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ने आपस में हाथ मिलाया है। दोनों संस्थानों के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं。
यह एमओयू केवल कागजी समझौता नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्यों और मरीजों के इलाज को आधुनिक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा。
🤝 क्या है इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य?
इस एमओयू के तहत BHU और IGIMS का लक्ष्य चिकित्सा अनुसंधान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। दोनों संस्थान अब साझा संसाधनों और विशेषज्ञता का उपयोग करके निम्नलिखित क्षेत्रों में काम करेंगे:
- 🔬 संयुक्त शोध परियोजनाएं (Joint Research Projects): गंभीर और दुर्लभ बीमारियों पर मिलकर रिसर्च करना।
- 🏥 क्लीनिकल रिसर्च: आधुनिक तकनीकों के विकास और प्रसार को बढ़ावा देना।
- 🎓 प्रशिक्षण और अकादमिक आदान-प्रदान: फैकल्टी और विद्यार्थियों के लिए ट्रेनिंग, वर्कशॉप और वैज्ञानिक संगोष्ठियों का आयोजन।
👥 उद्घाटन समारोह में शामिल प्रमुख हस्तियां
बीएचयू परिसर में संपन्न हुए इस हस्ताक्षर समारोह में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे:
- डॉ. बिंदे कुमार: निदेशक, IGIMS
- डॉ. संजय गुप्ता: संकायाध्यक्ष सह कार्यकारी निदेशक, BHU
- डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह: अधीक्षक, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (BHU)
आईजीआईएमएस के उपनिदेशक प्रो. (डॉ.) विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा, "यह साझेदारी शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को बेहतर संसाधन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी। जल्द ही विभिन्न संयुक्त परियोजनाओं पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा, जिसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है।"
BHU और IGIMS का यह मिलन उत्तर भारत में चिकित्सा सेवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल छात्रों को सीखने का नया अवसर देगा, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी नए नवाचार लेकर आएगा।
हर हर महादेव! 🙏


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