KVS/NVS/EMRS संयुक्त भर्ती: OBC-NCL सर्टिफिकेट की 'इश्यू डेट' विवाद पर BHU गेट पर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, प्रोविजनल इंटरव्यू की मांग

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बीएचयू सिंह द्वार पर केवीएस/एनवीएस/ईएमआरएस भर्ती में ओबीसी-एनसीएल प्रमाण-पत्र विवाद को लेकर प्रदर्शन करते अभ्यर्थी।


वाराणसी (27 सितंबर 2026): केवीएस/एनवीएस/ईएमआरएस (KVS/NVS/EMRS) संयुक्त भर्ती अधिसूचना संख्या 01/2025 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL) अभ्यर्थियों के जाति प्रमाण-पत्र की निर्गमन तिथि (Issue Date) को लेकर विवाद गहरा गया है। इसके चलते दस्तावेज़ सत्यापन और साक्षात्कार से वंचित होने की आशंका से जूझ रहे अभ्यर्थियों ने रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के मुख्य सिंह द्वार पर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक विरोध-प्रदर्शन किया।

क्या है पूरा विवाद? टियर-1 और टियर-2 पास करने के बाद उपजा संकट

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने कठिन चयन प्रक्रिया के तहत टियर-1 और टियर-2 दोनों लिखित परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की हैं। अब जब चयन का अंतिम पड़ाव (इंटरव्यू व डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) सामने है, तब केवल ओबीसी-एनसीएल प्रमाण-पत्र के जारी होने की तारीख को आधार बनाकर उनकी उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी अथवा पुन: निर्गमन के कारण यदि प्रमाण पत्र की तिथि में अंतर है, तो केवल इस तकनीकी आधार पर उनकी वास्तविक सामाजिक व आर्थिक पात्रता को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

वास्तविक पात्रता के सत्यापन और प्रोविजनल अनुमति की मांग

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्राधिकरण और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष स्पष्ट रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • सक्षम प्राधिकारी के रिकॉर्ड से जांच: यदि अभ्यर्थी के पास पुरानी अवधि का प्रमाण-पत्र है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा नया प्रमाण-पत्र भी जारी किया गया है, तो आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर वास्तविक पात्रता का सत्यापन कराया जाए।
  • साक्षात्कार से वंचित न किया जाए: केवल प्रमाण-पत्र की तारीख को आधार बनाकर योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से बाहर न किया जाए।
  • प्रोविजनल आधार पर शामिल करने का विकल्प: स्थिति स्पष्ट होने तक अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी को औपबंधिक (Provisional) रखते हुए चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने का अवसर मिले।
  • अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति: आवेदन रसीद, सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणीकरण और संबंधित सरकारी दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दिया जाए।

'प्रक्रिया रोकना नहीं, न्यायसंगत अवसर पाना हमारा लक्ष्य'

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को बाधित करना नहीं है, बल्कि अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर न्याय पाना है। इस अवसर पर रंजना, आदित्य, सरोणी, संदीप, धीरेंद्र, नामक, सूर्यमणि गौतम, परमदीप पटेल, शिवशक्ति, शांतनु सिंह, हिमांशु, पंकज और सुमन आनंद सहित बड़ी संख्या में प्रभावित अभ्यर्थी उपस्थित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण:

प्रतियोगी परीक्षाओं में कठिन परिश्रम से अंतिम चरण तक पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के लिए तकनीकी और दस्तावेजी औपचारिकताओं के चलते बाहर होना एक गंभीर चिंता का विषय है। भर्ती बोर्ड को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रमाण-पत्रों के पारदर्शी व तथ्यात्मक सत्यापन की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि किसी भी पात्र अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।

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