दिल्ली हादसे के बाद BHU के बाहर रहने वाले छात्रों पर बड़ा सवाल: हॉस्टल से आगे उनकी सुरक्षा कौन देखेगा?
वाराणसी: दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र-आवास के रूप में इस्तेमाल हो रही एक बहुमंजिला इमारत के गिरने से सात लोगों की मौत ने देशभर में छात्र आवास की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने न केवल निजी PG और हॉस्टलों की सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण छात्रों के निजी आवासों पर निर्भर होने के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया।
यह सवाल केवल दिल्ली का नहीं है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी BHU जैसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय के लिए भी यह एक जरूरी चेतावनी है।
क्योंकि BHU में पढ़ने वाला हर छात्र विश्वविद्यालय के हॉस्टल में नहीं रहता। बहुत से छात्र हॉस्टल न मिलने, सीमित सीटों, पाठ्यक्रम या अपनी आर्थिक परिस्थितियों के कारण विश्वविद्यालय के बाहर PG, लॉज, किराए के कमरे और साझा मकानों में रहते हैं।
ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि BHU में कितने हॉस्टल हैं। असली सवाल यह है कि जो छात्र BHU की पढ़ाई का हिस्सा हैं लेकिन रहने के लिए विश्वविद्यालय की चारदीवारी के बाहर हैं, उनकी सुरक्षित आवास व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय और स्थानीय प्रशासन की भूमिका क्या है?
सत्य निकेतन हादसे ने दबा हुआ सवाल सामने ला दिया
6 सितंबर 2026 को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के लिए इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में सात लोगों की मौत हुई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं की सुनवाई के दौरान छात्र हॉस्टलों की कमी, निजी PG में रहने की मजबूरी और ऐसे भवनों की सुरक्षा व्यवस्था का सवाल सामने आया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और सरकारी हॉस्टलों की अपर्याप्त संख्या छात्रों को निजी PG और हॉस्टलों पर निर्भर करने के लिए मजबूर कर सकती है। कोर्ट ने PG हॉस्टलों की सुरक्षा और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियामकीय ढांचे पर भी सवाल उठाए। 3
यही वह बिंदु है जहां दिल्ली की घटना BHU से जुड़ जाती है।
क्योंकि छात्र जहां पढ़ता है और जहां रहता है, दोनों जगहों की सुरक्षा उसके छात्र जीवन का हिस्सा हैं।
BHU के 72 हॉस्टल, लेकिन छात्र आवास का सवाल इससे बड़ा है
BHU की 2024-25 Annual Report के अनुसार विश्वविद्यालय में 72 हॉस्टल हैं, जिनमें करीब 11,000 छात्र निवासी हैं। विश्वविद्यालय खुद को 35,000 से अधिक छात्रों वाला बड़ा residential university बताता है।
इसका सीधा अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि बाकी सभी छात्र अनिवार्य रूप से बाहर रहते हैं, क्योंकि छात्रों की आवासीय स्थिति कई कारणों से अलग-अलग होती है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि BHU जैसी बड़ी छात्र आबादी के लिए कैंपस के बाहर मौजूद छात्र आवास व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यहीं से BHU के छात्र आवास की कहानी सिर्फ Hostel Allocation की कहानी नहीं रह जाती। यह Student Housing और Student Safety का बड़ा सवाल बन जाती है।
कैंपस की सीमा खत्म होती है, छात्र की समस्या नहीं
BHU का मुख्य परिसर अपने आप में एक बड़ा शैक्षणिक शहर जैसा है। लेकिन छात्र जीवन विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर खत्म नहीं होता। हॉस्टल नहीं मिलने या अपनी जरूरत के अनुसार आवास तलाशने वाले छात्र आसपास के बड़े इलाकों में रहने लगते हैं।
लंका, छित्तूपुर, हैदराबाद गेट, करौंदी, सीर गोवर्धनपुर, नारिया, सामनेघाट और आसपास के दूसरे इलाके लंबे समय से BHU से जुड़े छात्र जीवन के महत्वपूर्ण आवासीय क्षेत्र रहे हैं। इन क्षेत्रों में छात्रों को PG, लॉज, किराए के कमरे, साझा मकान और अन्य निजी आवास मिलते हैं।
यानी BHU के आसपास एक पूरा student housing ecosystem मौजूद है।
इस व्यवस्था में हजारों छात्र अपने बजट और जरूरत के हिसाब से कमरे तलाशते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि कमरे की उपलब्धता और कमरे की सुरक्षा में अंतर कौन तय करेगा?
कमरा मिल जाना और सुरक्षित कमरा मिलना दो अलग बातें हैं
किसी छात्र को 5,000 या 7,000 रुपये में कमरा मिल गया, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह कमरा सुरक्षित भी है।
छात्र जब PG या लॉज तलाशता है तो आमतौर पर उसकी प्राथमिकता होती है कि विश्वविद्यालय से दूरी कम हो, किराया बजट में हो, खाना उपलब्ध हो, इंटरनेट हो और आने-जाने में परेशानी न हो।
लेकिन क्या छात्र यह जांच सकता है कि जिस भवन में वह रह रहा है:
- उसकी संरचनात्मक स्थिति कैसी है?
- क्या भवन में जरूरत से ज्यादा लोग रह रहे हैं?
- बिजली की वायरिंग सुरक्षित है?
- आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता है?
- सीढ़ियां और छत सुरक्षित हैं?
- आपातकालीन निकास मौजूद है?
- भवन का इस्तेमाल छात्र आवास के रूप में करने की अनुमति है?
- मालिक या संचालक के पास आवश्यक स्थानीय अनुमति और सुरक्षा प्रमाण हैं?
ज्यादातर छात्रों के लिए इन सवालों की जांच करना आसान नहीं है।
और यही दिल्ली के हादसे से निकलने वाला सबसे बड़ा सबक है।
BHU में यह मुद्दा पहले भी पहचाना जा चुका है
यह मान लेना गलत होगा कि BHU प्रशासन को कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों की समस्या का पता ही नहीं है। BHU के प्रशासनिक ढांचे में Student Accommodation Committee का प्रावधान है, जिसे छात्रों की accommodation problems पर सलाह देने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके गठन में हॉस्टल प्रतिनिधियों के साथ approved lodges और city delegacy circles के छात्र प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है।
यानी विश्वविद्यालय की अपनी व्यवस्था यह स्वीकार करती है कि छात्र आवास का प्रश्न केवल कैंपस के हॉस्टलों तक सीमित नहीं है।
यहीं से अगला सवाल पैदा होता है:
क्या इस व्यवस्था को आज के विशाल निजी PG और किराए के आवास वाले छात्र क्षेत्र के हिसाब से दोबारा सक्रिय और मजबूत करने की जरूरत नहीं है?
छात्रों के लिए सबसे बड़ा खतरा केवल इमारत नहीं है
छात्र आवास की समस्या को सिर्फ भवन गिरने जैसी बड़ी दुर्घटना से जोड़कर देखना भी अधूरा होगा। असुरक्षित छात्र आवास की समस्या कई स्तरों पर सामने आती है।
खराब विद्युत व्यवस्था, आग से बचाव की कमी, जरूरत से ज्यादा छात्रों को एक कमरे या भवन में रखना, खराब स्वच्छता, पानी की समस्या, कमजोर सीढ़ियां, जर्जर छत, संकरी गलियां, आपात स्थिति में एंबुलेंस की पहुंच और रात के समय सुरक्षित आवागमन जैसी समस्याएं भी छात्र सुरक्षा का हिस्सा हैं।
इनमें से हर समस्या अपने आप में छोटी लग सकती है, लेकिन जब हजारों छात्र वर्षों तक ऐसी परिस्थितियों में रहते हैं तो यह एक बड़ी सार्वजनिक समस्या बन जाती है।
किराया भी छात्र सुरक्षा का हिस्सा है
बाहर रहने वाले छात्रों के लिए दूसरा बड़ा सवाल किराये का है। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला हर छात्र समान आर्थिक स्थिति से नहीं आता। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अनेक छात्रों के लिए कमरे का किराया, बिजली, पानी, भोजन और आने-जाने का खर्च पढ़ाई के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा बन जाता है।
महंगा और सुरक्षित कमरा लेना हर छात्र के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में आर्थिक मजबूरी कई बार छात्रों को सस्ते लेकिन कम सुविधाजनक या कम सुरक्षित आवास की ओर धकेल सकती है।
इसलिए Student Housing को Student Welfare और आर्थिक समानता से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
लड़कियों के लिए छात्र आवास का सवाल और संवेदनशील है
महिला छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की जरूरत और भी व्यापक है। केवल कमरे की चारदीवारी पर्याप्त नहीं है। भवन का प्रवेश-निकास, आसपास का वातावरण, CCTV, जिम्मेदार प्रबंधन, आपातकालीन संपर्क, रात में परिवहन और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए BHU के छात्र आवास पर किसी भी भविष्य की नीति में महिला छात्रों की सुरक्षा के लिए अलग और स्पष्ट मानक होने चाहिए।
क्या BHU के आसपास सुरक्षित PG की आधिकारिक व्यवस्था बन सकती है?
यहां एक व्यावहारिक रास्ता निकल सकता है।
BHU अपने आसपास के छात्र बहुल क्षेत्रों में मौजूद PG, लॉज और अन्य छात्र आवासों के लिए कुछ न्यूनतम मानक तय कर सकता है। जो आवास इन मानकों को पूरा करें, उन्हें विश्वविद्यालय की एक सार्वजनिक Verified Student Housing List में शामिल किया जा सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं होगा कि विश्वविद्यालय निजी मकान मालिकों का पूरा प्रशासन अपने हाथ में ले ले। इसका उद्देश्य छात्रों को यह जानकारी देना होगा कि कौन-सा आवास बुनियादी सुरक्षा और सुविधा मानकों की जांच से गुजर चुका है।
ऐसी सूची में कम से कम ये जानकारी हो सकती है:
- स्थान और BHU से अनुमानित दूरी
- आवास का प्रकार: PG, लॉज या किराए का कमरा
- उपलब्ध सुविधाएं
- महिला छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था
- फायर सेफ्टी से संबंधित स्थिति
- आपातकालीन संपर्क
- किराये की पारदर्शी जानकारी
- अधिकतम अनुमत occupancy
सिर्फ नए हॉस्टल बनाने से पूरी समस्या खत्म नहीं होगी
BHU में नए हॉस्टल बनाना और मौजूदा हॉस्टलों की क्षमता बढ़ाना निश्चित रूप से जरूरी है। लेकिन यदि विश्वविद्यालय की छात्र आबादी बढ़ती रहती है और आसपास के शहर में हजारों छात्र निजी आवासों पर निर्भर रहते हैं, तो केवल कैंपस के अंदर नए भवन बनाना पर्याप्त समाधान नहीं होगा।
जरूरत एक ऐसी Student Housing Policy की है जो कैंपस और कैंपस के बाहर दोनों को एक साथ देखे।
इसमें तीन चीजें समानांतर चलनी चाहिए:
पहला: नए हॉस्टल और अधिक छात्र सीटें।
दूसरा: पुराने हॉस्टलों की नियमित structural और fire safety जांच।
तीसरा: कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और सत्यापित private accommodation की व्यवस्था।
छित्तूपुर से लंका तक: छात्र आवास को सिर्फ निजी मामला क्यों माना जाए?
जब किसी इलाके में हजारों छात्र रहते हैं तो वहां की सड़क, पानी, बिजली, कचरा, सीवर, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था का सीधा असर विश्वविद्यालय के छात्र जीवन पर पड़ता है।
इसलिए BHU, नगर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की जरूरत है।
विश्वविद्यालय को अपने आसपास के छात्र बहुल इलाकों का एक Student Housing and Safety Map तैयार करने की पहल करनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि छात्र किन क्षेत्रों में सबसे अधिक रहते हैं और किन इलाकों में सुरक्षा, परिवहन या बुनियादी सुविधाओं की समस्या ज्यादा है।
यह काम किसी दुर्घटना के बाद शुरू होने के बजाय सामान्य समय में किया जाना चाहिए।
एक शिकायत व्यवस्था भी जरूरी है
कैंपस के बाहर रहने वाला छात्र यदि अपने कमरे में गंभीर बिजली समस्या, पानी, जबरन occupancy, असुरक्षित भवन, आग से बचाव की कमी या अन्य गंभीर समस्या देखता है तो उसके पास शिकायत करने का आसान रास्ता होना चाहिए।
BHU एक dedicated Student Housing Safety Helpline या ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित कर सकता है।
शिकायत का उद्देश्य हर निजी मकान मालिक को नियंत्रित करना नहीं बल्कि गंभीर सुरक्षा जोखिमों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर संबंधित स्थानीय प्राधिकरण तक मामला पहुंचाना होना चाहिए।
सबसे पहले होना चाहिए एक बड़ा Safety Audit
दिल्ली की घटना के बाद BHU के लिए सबसे व्यावहारिक कदम किसी नए भवन की घोषणा से पहले एक व्यापक छात्र आवास सुरक्षा सर्वे हो सकता है।
इसमें विश्वविद्यालय के हॉस्टलों के साथ-साथ छात्र बहुल इलाकों में मौजूद निजी छात्र आवासों की स्थिति का अध्ययन किया जा सकता है।
इस सर्वे में यह देखा जाना चाहिए कि छात्र कहां रहते हैं, किस तरह के भवनों में रहते हैं, सामान्य किराया कितना है, सबसे बड़ी समस्याएं क्या हैं और किन स्थानों पर तत्काल सुरक्षा हस्तक्षेप की जरूरत है।
यह जानकारी BHU की भविष्य की हॉस्टल नीति को भी ज्यादा वास्तविक बना सकती है।
विकास का मतलब केवल नई इमारत नहीं
किसी विश्वविद्यालय में नई बिल्डिंग, नई सड़क, नई प्रयोगशाला या नया विभाग बनना विकास का हिस्सा है। लेकिन छात्र के लिए सुरक्षित रहने की जगह भी उतनी ही बुनियादी जरूरत है।
अगर छात्र दिन में एक बड़े विश्वविद्यालय में पढ़ता है लेकिन रात में टूटी दीवार, असुरक्षित सीढ़ियों, खराब बिजली व्यवस्था, भीड़भाड़ वाले PG या असुरक्षित भवन में रहने को मजबूर है, तो छात्र कल्याण की तस्वीर अधूरी है।
छात्र आवास कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं है। यह उच्च शिक्षा की बुनियादी जरूरत है।
दिल्ली ने हादसे के बाद सवाल उठाया, BHU को हादसे से पहले उठाना चाहिए
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG और छात्र आवासों की सुरक्षा जांच का मुद्दा सामने आया। दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्र हॉस्टलों की अपर्याप्तता और निजी PG पर निर्भरता को भी गंभीरता से देखा। सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर भी छात्र आवास और भवन सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों पर कार्रवाई की मांग सामने आई। 6
BHU के लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि किसी दुर्घटना का इंतजार किए बिना छात्र आवास की व्यवस्था को देखा जाए।
क्योंकि BHU का छात्र केवल वह नहीं है जो विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहता है। वह छात्र भी BHU का हिस्सा है जो लंका, चित्तूपुर, हैदराबाद गेट, करौंदी, सीर, नारिया या सामनेघाट के किसी कमरे में रहकर रोज विश्वविद्यालय आता है।
BHU के सामने असली सवाल
हॉस्टल में रहने वाला छात्र ही नहीं, बाहर रहने वाला छात्र भी BHU का छात्र है।
तो क्या उसकी आवासीय सुरक्षा के लिए भी कोई व्यवस्थित नीति नहीं होनी चाहिए?
अब BHU को क्या करना चाहिए?
- Hostel Capacity और Allocation का वार्षिक सार्वजनिक डेटा जारी किया जाए।
- सभी विश्वविद्यालयी हॉस्टलों का नियमित Structural और Fire Safety Audit कराया जाए।
- कैंपस के आसपास छात्र बहुल इलाकों का Student Housing Survey कराया जाए।
- सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले PG और निजी छात्र आवासों की verified list विकसित की जाए।
- महिला छात्रों के लिए सुरक्षित निजी आवास के अलग मानक तैयार किए जाएं।
- Student Housing Safety Helpline या ऑनलाइन शिकायत प्रणाली बनाई जाए।
- नए हॉस्टल और अतिरिक्त सीटों के लिए समयबद्ध योजना सार्वजनिक की जाए।
- BHU, नगर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के बीच छात्र आवास को लेकर नियमित समन्वय व्यवस्था बनाई जाए।
अंतिम सवाल: क्या हमें हादसे के बाद ही जागना है?
सत्य निकेतन में जो हुआ, उसे केवल दिल्ली की एक इमारत का हादसा मानकर भूल जाना आसान है। लेकिन ऐसी घटनाएं हमें उन हजारों छात्रों की तरफ देखने के लिए मजबूर करती हैं जो अपने विश्वविद्यालयों के आसपास छोटे-बड़े कमरों, PG और लॉज में रहते हैं।
BHU में भी यह समय केवल नए हॉस्टल की मांग करने का नहीं, बल्कि पूरे Student Housing System को नए सिरे से देखने का है।
कितने छात्र हॉस्टल में हैं, कितने बाहर हैं, बाहर रहने वाले किन इलाकों में रहते हैं, उनके आवास कितने सुरक्षित हैं और संकट की स्थिति में उनके पास मदद का कौन-सा रास्ता है, इन सवालों के जवाब किसी दुर्घटना के बाद नहीं बल्कि पहले से उपलब्ध होने चाहिए।
क्योंकि छात्र के लिए विश्वविद्यालय सिर्फ वह जगह नहीं है जहां वह दिन में पढ़ता है। जिस कमरे में वह रात को लौटता है, वह भी उसके विश्वविद्यालयी जीवन का हिस्सा है।
और उस कमरे की सुरक्षा को केवल छात्र की निजी समस्या मान लेना, छात्र कल्याण की अवधारणा को बहुत छोटा कर देना होगा।
स्रोत आधार: BHU Annual Report 2024-25, BHU Student Accommodation Committee से संबंधित आधिकारिक नियम/दस्तावेज और सितंबर 2026 के सत्य निकेतन छात्र-PG हादसे तथा उसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही से संबंधित रिपोर्टें।
संपादकीय टिप्पणी: यह लेख किसी विशेष निजी PG, मकान मालिक या इलाके पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं है। इसका उद्देश्य BHU के छात्रों के लिए सुरक्षित, पर्याप्त और जवाबदेह छात्र आवास व्यवस्था पर सार्वजनिक चर्चा को आगे बढ़ाना है।


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