BHU: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर विशेष समारोह, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय की प्रासंगिकता पर हुआ मंथन
वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के संबोधि सभागार में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रबुद्ध वक्ताओं ने पंडित जी के एकात्म मानव दर्शन, अंत्योदय और स्वदेशी चिंतन की समकालीन आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पुष्पांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का औपचारिक शुभारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित कर किया गया। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने पंडित जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात उपस्थित विशिष्ट अतिथियों और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
एकात्म मानववाद और अंत्योदय से ही संभव है समग्र विकास
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय, ओडिशा के कुलपति प्रो. अजीत कुमार शासनी रहे। मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्री संजय जी ने अपने विचार साझा किए। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (पूर्वी उत्तर प्रदेश) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री मनोज जी ने भी सभा को संबोधित किया।
वक्ताओं ने रेखांकित किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित है। उनके विचार केवल राजनीतिक दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान (अंत्योदय), ग्राम-केंद्रित अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता का व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करते हैं। वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्वदेशी और समावेशी विकास की दिशा में उनका दर्शन अत्यंत प्रासंगिक है।
अध्यक्षीय उद्बोधन और सहभागिता
समारोह की अध्यक्षता प्रो. अशोक कुमार उपाध्याय ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय चिंतन परंपरा और एकात्म मानव दर्शन के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों का स्वागत डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय ने किया, जबकि मंच संचालन प्रो. आर. एन. त्रिपाठी द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सीमा मिश्रा ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पीठ के शोध छात्र कमलाकांत दुबे, सचिन त्रिपाठी, दिव्यान्शू, राजकुमार, डॉ. उमेश, शुभम मिश्रा, कार्यालय सहायक विवेक कुमार उपाध्याय और विकाश सहित संकाय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्र-निर्माण में पंडित जी के योगदान से परिचित कराना तथा उनके विचारों की व्यावहारिक उपयोगिता पर अकादमिक संवाद स्थापित करना रहा।



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