IIT BHU का कमाल: कबाड़ की साइकिल को बना दिया 'हाइड्रोजन ई-बाइक', 1 किलो ईंधन में चलेगी 300 किमी | भारत सरकार ने दिया पेटेंट
महंगी पेट्रोल और प्रदूषण की समस्या के बीच IIT-BHU (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के वैज्ञानिकों ने एक शानदार समाधान खोज निकाला है। यहाँ के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर और छात्रों की टीम ने कबाड़ में पड़ी एक पुरानी साइकिल को हाईटेक 'हाइड्रोजन ई-बाइक' (Hydrogen E-Bike) में बदल दिया है।
इस नवाचार को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने “A Multi-Mode Electric Vehicle” शीर्षक से आधिकारिक पेटेंट भी दे दिया है। यह बाइक न केवल इको-फ्रेंडली है, बल्कि जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगी।
🚲 तीन मोड में चलेगी यह बाइक (3-Way Interconvertible System)
प्रो. कल्पना चौधरी (विद्युत अभियंत्रण विभाग) के नेतृत्व में बनी इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका 'मल्टी-मोड' होना है। इसे आप तीन तरीकों से चला सकते हैं:
- 1. हाइड्रोजन मोड: इसमें 500 वॉट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगा है।
- 2. इलेक्ट्रिक मोड: इसे 24 वोल्ट की बैटरी से भी चलाया जा सकता है।
- 3. पैडल मोड: बैटरी या फ्यूल खत्म होने पर इसे सामान्य साइकिल की तरह पैडल मारकर चलाएं।
💰 खर्च और माइलेज: जानकर हैरान रह जाएंगे
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बाइक की दक्षता (Efficiency) कमाल की है:
| लागत (Cost) | मात्र ₹5,000 (फ्यूल सेल की कीमत छोड़कर) |
| समय लगा | केवल 3 महीने |
| माइलेज (Mileage) | 1 किलो हाइड्रोजन में 300 किमी तक (दावा) |
👥 इस टीम ने किया करिश्मा
यह प्रोजेक्ट SERB (Science and Engineering Research Board) द्वारा वित्तपोषित था। इस सफलता के पीछे इन होनहारों की मेहनत है:
- मेंटर: प्रो. कल्पना चौधरी (Dept. of Electrical Engineering)
- टीम: मितांशु मीणा, ऐश्वर्या, अथर्व, पीयूष सिंह (PMRF Fellow) और विनीत भारद्वाज।
संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इसे भविष्य के परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि यह नवाचार संस्थान की अनुसंधान संस्कृति को दर्शाता है।
संसाधनों का पुनः उपयोग (Recycling) और स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) का यह बेहतरीन उदाहरण है। IIT BHU की यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
हर हर महादेव! 🙏


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