BHU में उठी मांग: गांधी जी को कानूनी तौर पर 'राष्ट्रपिता' घोषित करे सरकार | गांधी चबूतरा पर जुटे विद्वान, हिंदी की स्थिति पर जताई चिंता

Gandhi Vimarsh Kendra Seminar BHU Gandhi Chabutra



वाराणसी:
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित गांधी चबूतरा पर आज विचारों का महाकुंभ लगा। गांधी विमर्श केंद्र के तत्वावधान में “महात्मा गांधी के भाषाई विमर्श” विषय पर एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस गोष्ठी में जहाँ एक तरफ गांधी जी के 'जनभाषा' के स्वप्न को याद किया गया, वहीं दूसरी तरफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर सरकार से गांधी जी को वैधानिक मान्यता देने की मांग की गई।


🗣️ "भाषा की अस्मिता खतरे में है": प्रो. ओमप्रकाश (JNU)

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रो. ओमप्रकाश ने गांधी जी के भाषाई चिंतन को बहुत ही बारीकी से रखा। उन्होंने कहा कि गांधी जी हमेशा 'जनभाषा' (आम आदमी की भाषा) के पक्षधर थे।

चिंता: प्रो. ओमप्रकाश ने हिंदी के विकास, शब्दकोश के विस्तार और भाषा की बदलती अस्मिता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमें राजभाषा और राष्ट्रभाषा के बीच के अंतर को समझते हुए जनभाषा को मजबूत करना होगा।

📜 गोष्ठी में पास हुए दो अहम प्रस्ताव (Resolutions)

विचार-विमर्श के बाद सभा में सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:

  • पहला: महात्मा गांधी को वैधानिक (Legally) रूप से 'राष्ट्रपिता' घोषित किया जाए।
  • दूसरा: BHU स्थित ऐतिहासिक 'गांधी चबूतरा' का विकास और सुंदरीकरण किया जाए।

👥 इन्होंने भी रखे विचार

गोष्ठी में कई वरिष्ठ चिंतकों और विद्वानों ने अपनी बात रखी:

  • लोकतंत्र सेनानी विजय नारायण
  • प्रो. सुरेंद्र प्रताप (पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, काशी विद्यापीठ)
  • कुंवर सुरेश
  • अमन राय

कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. शम्मी सिंह ने रखी। मंच का संचालन शोध छात्र राणा रोहित ने किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन मुरारी यादव ने किया।



गांधी जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। भाषा पर उनकी पकड़ और दृष्टि हमें आज के दौर में भी रास्ता दिखाती है। BHU के छात्रों और विद्वानों की यह पहल सराहनीय है।

हर हर महादेव! 🙏

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