BHU South Campus: किसानों की आय बढ़ाने के लिए बरकच्छा में लगी 'स्वदेशी स्टीम आसवन इकाई', अब औषधीय तेल निकालना हुआ आसान
मिर्जापुर/वाराणसी:
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) का राजीव गांधी दक्षिणी परिसर (RGSC), बरकच्छा अब किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा चुका है। यहाँ एक स्वदेशी रूप से विकसित स्टीम आसवन इकाई (Indigenous Steam Distillation Unit) की शुरुआत की गई है।
यह मशीन औषधीय (Medicinal) और सुगंधित (Aromatic) पौधों से तेल निकालने में सक्षम है, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी फसल का सही दाम और 'वैल्यू एडिशन' मिल सकेगा।
🌿 क्या है इस यूनिट की खासियत? (Key Features)
प्रो. बी.एम.एन. कुमार (प्रोफेसर इन-चार्ज, RGSC) के नेतृत्व में विकसित और डॉ. शशिधर के.एस. (फार्म इन-चार्ज) द्वारा क्रियान्वित यह प्रोजेक्ट कई मायनों में खास है:
- 🏗️ क्षमता (Capacity): यह यूनिट एक बार में 5 क्विंटल (500 किलोग्राम) फसल को प्रोसेस कर सकती है।
- 🌱 किन फसलों का तेल निकलेगा: पामारोजा, जिरेनियम, मेंथा, तुलसी, गुलाब, लैवेंडर, सिट्रोनेला, चमेली और खस (Vetiver) जैसे पौधों का वैज्ञानिक तरीके से तेल निकाला जा सकेगा।
- 🇮🇳 स्वदेशी तकनीक: यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
👨🌾 किसानों को कैसे होगा फायदा?
अब तक विंध्य क्षेत्र के किसानों को सुगंधित पौधों की खेती करने के बाद तेल निकालने के लिए दूर जाना पड़ता था या महँगी मशीनों का सहारा लेना पड़ता था।
- किफायती सेवा: स्थानीय किसान अब बहुत ही कम निर्धारित शुल्क (Minimal Fixed Charge) देकर यहाँ अपनी फसल से तेल निकलवा सकेंगे।
- मुनाफे में बढ़ोतरी: फसल खराब होने (Post-harvest losses) का डर खत्म होगा और सीधे तेल बेचने से उनकी कमाई बढ़ेगी।
- ग्रामीण उद्यमिता: इससे गाँव स्तर पर छोटे उद्योगों और 'आत्मनिर्भर कृषि' को बढ़ावा मिलेगा।
प्रो. कुमार ने कहा कि यह परियोजना अकादमिक ज्ञान को सामुदायिक लाभ (Community Benefit) में बदलने की BHU की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह 'लोकल प्रोसेसिंग' को बढ़ावा देकर ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करेगी।
BHU का यह कदम साबित करता है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और किसानों की उन्नति में भी भागीदार है।


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